imagination is greater knowledge

imagination is greater knowledge …. आइंस्टीन का कथन है, और जब पहली बार सुना था.. तो लगा फॉल्सी है। आंइस्टीन भला कल्पनाओं को ज्ञान से उंचा स्थान कैसे दे सकते हैं। सर्च किया तो पता लगा – सचमुच ही कहा था। लेकिन अनकन्विंस्ड रहा।

नॉलेज इज सुप्रीम, नॉलेज इज पावर .. इमेजिनेशन और कल्प-गल्प कभी उसके पासंग नही हो सकती। बरसों बाद फेसबुक और सोशल मीडिया पर लिखना शुरू किया। अमूमन वही नॉलेज, जो एवरेज पढ़े लिखे के पास आलरेडी मौजूद है। मैने कोई नया खुलासा, गुप्त ज्ञान नही लिखां। जो हमेशा से पब्लिक डोमेन, या अकादमिक लेखन मे मौजूद था, उन्हे आपस मे रिलेट करके देख्ने, और समझने की आदत थी, उसे लिखते वक्त भी उपयोग किया। यह स्वाभाविक सी बात थी। और समझ यह आया कि बहुत से साथी, जो उन सूचनाओं को भली भांति अकादमिक रूप से जानते थे, लेकिन उन तथ्यों को आपस मे जोड़कर भावार्थ निकालने पर नजरिया बदला। यही इमेजिनेशन है।

आइस्टीन पेटेंट ऑफिस मे क्लर्क थे। दस्तावेजों को परीक्षण करना, और फाइले बनाने का काम था। उन्होंने एस्ट्रोफिजिक्स नही पढी थी, गणित मे अवश्य होशियार थे। उस ऑफिस मे गाल पर हाथ धरे आइंस्टीन, सोचते सोचते दूर ग्रहो पर पहुंच जाते। उनकी चाल, उनका पथ, उनका घूर्णन वहीं कुर्सी टेबल पर बैठे बैठे सोचते, फिर पेपर पर गणितीय गणनाऐ करते। अंतरिक्षीय पिण्डों पर जो फार्मूले उन्होने निकाले, यह सब मनुष्य के स्पेस मे जाने के 50 साल पहले कर लिया – सिर्फ कल्पनाओं मे। सोचिए, एक कल्पना गलत- और समय और सापेक्षता की गणनाऐ झूठी हो जाती। तो अगर आंस्टीन कहें – इमेजिनेशन इज ग्रेटर देन नॉलेज …. तो क्या ही गलत कहा??

लिखते वक्त कांसेप्ट को महत्व देता हूं। बहुत मात्रिक- भाषिक शुद्धता, या आंकड़ों की परिशुद्धता पर जोर नही देता। बस, झूठ नही लिखा हो, और तथ्य सिलसिलेवार हों। गद्य मे प्रवाह हो, और पढते हुए दिमाग मे जो तस्वीर बन रही है, वह सत्य के करीब होनी चाहिए। मै आपके इमेजिनेशन की मसल को मजबूत करना चाहता हूँ। जो विडियो, रील्स, यूट्यूब, के जमाने मे कमजोर, वेस्टीजियल होती चली जा रही है। पिछली रील, पिछला विडियों जो आपने देखा, याद नही। पिछली पोस्ट की पंचलाइन याद है।

देखा हुआ याद नही रहता, क्योकि दिमाग विजुअली बिजी होता है। मै यू ट्यूब से ज्ञान की चीजे देखता नही, सुनता हूं। दिमाग का श्रवण केन्द्र यूनिफोकस होकर कथन की क्रोनोलॉजी पर टिका रहता है। विवरण सुनने या पढने से कल्पना शक्ति को खुला आकाश मिलता है। चांद सी संदर, गोरा रंग, रेशमी जुल्फें, लंबी टांगे, गुलाब से होठ – आप एक हजार सूरते सोच सकते है। मै यहां सोनाली बेन्द्रे की तस्वीर चिपका दूं, तो आपकी सारी दिमागी सूरते हवा हो जाऐंगी। आप मेरे दिए विजुअल तक रह सीमित रह जाऐंगे।

कई मित्र कहते है, यूट्यूब पर आ जाओ। चैनल बना लो, दिखो। अरे भाई, काहे दिखूं?? ये सब मेरा प्रोफेशन नही। चलते फिरते सोचता हूं, 10 मिनट मे लिखकर फेंक देता हूं। कैमरा लाइट एक्शन मेरा जॉनर नही, शौक नहीं। और न ही मै पहचाने जाने, सेलेब्रिटी बनने, या ट्विटर, यू-ट्यूब, फेसबुक से पैसे/वोट कमाने का शौक रखता हूं।

वेल ऑफ हू, आपके बौद्धिक पहलू को निखारना अपना सीएसआर एक्ट समझता हूं। ज्ञान आपको हजारो यू ट्यूब चैनल दे रहे है। मै कुछ कल्पना निखार दूं, तो जीवन सफल हो। वह ज्यादा कठिन लक्ष्य है, और आइंस्टीन भी कह गए है इमेजिनेशन इज ग्रेटर देन नॉलेज ….