छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी

छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी ●● साहित्य और फिल्मे अपने दौर का आईना होती है। 1960 के दौर मे यह फिल्म आई, जिसका नाम था-हम हिंदुस्तानी आजादी का पहला दशक है। एक नये किस्म का देश है, इतिहास मे पहली बार एक अलग तरह की सरकार है। अभी आजादी के आंदोलन की स्मृति मिटी नही है, घाव सूखे नही… मगर उन्हे भुलाकर एक नई दिशा मे चलने का संकल्प ठाना जा चुका हैं। ●● स्क्रीन पर नायक धुन सुनकर एक तरफ देखता है। फ्रेम मे तिरंगा लहराता है। कोई जनसभा है- गांधी टोपियां, नेहरू और मोरारजी बात करते दिखते है। अगले शॉट मे नायक, जो कोई इंजीनियर लगता है, किसी पहाड़ी साइट पर गीत गाते हुए चलता है। छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी नए दौर में लिखेंगे, मिल कर नई कहानी हम हिंदुस्तानी, हम हिंदुस्तानी ●● सड़के दिखती है, पार्क दिखते है। उनपर कदमताल करते युवा,जो शायद फौजी है, या एसीसीसी के कैडेट्स… । फ्रेम लाल किले पर रूकता है, जहां तिरंगा शान से लहरा रहा है … आज पुरानी ज़ंजीरों को तोड़ चुके हैं क्या देखें उस मंज़िल को जो छोड़ चुके हैं आकाश मे सेना के जेट उड़ते दिखते हैं। और पैराशूट से सैनिक कूद रहे है। यह दौर तकनीक की उछाल का है, लोकतंत्र और उसमे आम नागरिक को राष्ट्रनिर्माण मे अग्रणी भूमिका देने का है। गीत गूंज रहा है – चांद के दर पर जा पहुंचा है आज ज़माना, नए जगत से हम भी नाता जोड़ चुके हैं। नया खून है नई उमंगे अब है नई जवानी … हम हिंदुस्तानी!!! ●● फ्रेम में कुतबमीनार है, फतेहपुर सीकरी और फिर ताजमहल। ये अतीत था, पुरानी मंजिले थी। अब आगे और बनाना है, गढना है। 60 के दशक का युवा उत्साह से लबरेज है – हम को कितने ताजमहल हैं और बनाने, कितने हैं अजंता हमको और सजाने अभी पलटना है रुख कितने दरियाओं का, कितने पर्वत राहों से हैं आज हटाने …! सीन दिख रहा है बांध बनाने का। दूसरी पंचवर्षीय योजना, विशाल बांधों और सिंचाई परियोजनाओं के लिए याद की जाती है, तब निर्माण चल रहा था। गीत जारी है … नया खून है नई उमंगे अब है नई जवानी … हम हिंदुस्तानी!!! हम हिंदुस्तानी!!! ●● संगीत बज रहा है। संसद दिखती है, राष्ट्रपति का निवास और सुप्रीम कोर्ट …. याने लोकतंत्र, सार्वभौमिकता और न्याय। नायक किसी क्रेन मे झूलकर कुछ इंस्पेक्शन कर रहा है। क्रेन का आपेटर पीसना पोछ फिर काम मे जुट जाता है। गीत गूंजता है – आओ मेहनत को अपना ईमान बनाएं अपने हाथों से अपना भगवान बनाएं … राम की इस धरती को गौतम की भूमि को, सपनों से भी प्यारा हिंदुस्तान बनाएं। आह, राम तब भी हमारे आदर्श थे, गौतम बुद्ध भी। दिल हरा हो जाता है। दोनो का नाम एक साथ,और जेहन मे तस्वीर शांति और मुस्कान की उभरती है। स्क्रीन पर सपनो से प्यारा हिदुस्तान एक कारखाने को दिखा रहा है। ये खाद और फर्टिलाइजर के हिदुस्तान के पहले कारखाने हैं।चिमनी का धुंआ है, रेलगाड़ी है, जेट सुधारता टेक्नीश्यिन दिखता है … नया खून है नई उमंगे अब है नई जवानी …हम हिंदुस्तानी!!! हम हिंदुस्तानी!!! ●● अब स्वर्णगर्भा धरती की बारी है, किसान दिखते है। खेत की उपज दिखती है। लोग है, मंदिर और मस्जिद हैं – हर ज़र्रा है मोती आँख उठाकर देखो, मिट्टी में सोना है हाथ बढ़ाकर देखो। सोने की ये गंगा है चांदी की जमुना, चाहो तो पत्थर पे धान उगाकर देखो …. ●● साहित्य और फिल्मे अपने दौर का आईना होती है। ये गीत उस दौर की ऐस्पिरेशन और कलेक्टिव थिंकिग को बताता है। क्या चल रहा था… और क्या संदेश जनता मे फैलाने की कोशिश थी। निस्सन्देह, यह गीत भी एक प्रोपगण्डा है। मगर किसी के खिलाफ नही, विरूद्ध नही है। आम हिंदुस्तानी को गौरव देने, और आश्वस्त करने की कोशिश है। सबको मिलकर मेहनत करने, और अतीत से पीछा छुड़ाकर एक नए सृजन को प्रेरित करती है। ●● फिल्में हमारी भी है। अतीत के घाव कुरेदकर, अतिरेक और शोर से भरी, गुस्सा जगाती, जुगुप्सा फैलाती … फिल्मे बन रही है- वॉर मूवीज, टेम्पर्ड बायोग्राफी, जो हॉल से बाहर निकल किसी को भून देने, सबक सिखा देने, सावधान रहने की सलाह देती हैं। दस सालों मे कोई याद रखने लायक मूवी नही आई है। ये दौर हमारा है। 50 साल बाद जब इस फिल्मों का कोई मूल्यांकन करेगा, वह हमारे फिल्मकारो और सरकार का नही, मेरा और आपका मूल्यांकन करेगा। ●● विडियो मे गीत की कुछ पंक्तियां नही है वो भी सुन ले – और विजुअल जेहन मे अपनी चाहत से बना लें। 60 साल पुरानी चेतावनी है, हमारी पीढी के लिए… दाग गुलामी का धोया है जान लुटा के दीप जलाए हैं ये कितने दीप बुझा के ली है आज़ादी, तो फिर इस आज़ादी को रखना होगा हर दुश्मन से.. आज बचा के ●● नया खून है नई उमंगे अब है नई जवानी ??? हम हिंदुस्तानी??? हम हिंदुस्तानी??